लंबित रोजगार प्रकरणों के निराकरण की मांगो पर 23 अगस्त को एसईसीएल कुसमुंडा सहित गेवरा दीपका खदान बंद कर भू विस्थापित करेंगे प्रदर्शन
लंबित रोजगार प्रकरणों के निराकरण की मांगो पर 23 अगस्त को एसईसीएल कुसमुंडा सहित गेवरा दीपका खदान बंद कर भू विस्थापित करेंगे प्रदर्शन
हमर छत्तीसगढ न्यूज संभागीय ब्यूरो रिपोर्टर – दाऊराम राठौर
छत्तीसगढ़ किसान सभा और रोजगार एकता संघ द्वारा एसईसीएल के खदानों से प्रभावित भू विस्थापित किसानों की लंबित रोजगार प्रकरणों का तत्काल निराकरण की मांग को लेकर 23 अगस्त को कुसमुंडा सहित गेवरा दीपका खदान बंद करते हुए कार्यालय में प्रदर्शन की घोषणा की गई है।
किसान सभा के प्रदेश संयुक्त सचिव प्रशांत झा ने कहा कि भू विस्थापित रोजगार के लंबित प्रकरणों का निराकरण की मांग करते हुए थक गए हैं अब अपने अधिकार को छिन कर लेने का समय आ गया है। विकास के नाम पर अपनी गांव और जमीन से बेदखल कर दीये गए विस्थापित परिवारों की जीवन स्तर सुधरने के बजाय और भी बदतर हो गई है। 40-50 वर्ष पहले कोयला उत्खनन करने के लिए किसानों की हजारों एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था।कोयला खदानों के अस्तित्व में आ जाने के बाद विस्थापित किसानों और उनके परिवारों की सुध लेने की किसी सरकार और खुद एसईसीएल के पास समय ही नहीं है।विकास की जो नींव रखी गई है उसमें प्रभावित परिवारों की अनदेखी की गई है। खानापूर्ति के नाम पर कुछ लोगों को रोजगार और बसावट दिया गया जमीन किसानों का स्थाई रोजगार का जरिया होता है। सरकार ने जमीन लेकर किसानों की जिंदगी के एक हिस्सा को छीन लिया है। भू विस्थापित किसानों के पास अब संघर्ष के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा है। पुराने लंबित रोजगार, को लेकर एसईसीएल गंभीर नहीं है किसान सभा भू विस्थापितों की समस्याओं को लेकर उग्र आंदोलन की तैयारी कर रही है।
उल्लेखनीय है कि 13 अगस्त को सीएमडी कार्यालय बिलासपुर का भी घेराव किया गया था और बैठक में जल्द निराकरण का आश्वाशन दिया गया था लेकिन उसपर कोई कार्यवाही शुरू नही हुई है।
भूविस्थापित रोजगार एकता संघ के नेता रेशम यादव,दामोदर श्याम,रघु यादव, सुमेन्द्र सिंह कंवर ठकराल ने कहा कि भू विस्थापितों को बिना किसी शर्त के जमीन के बदले रोजगार देना होगा और वे अपने इस अधिकार के लिए अंतिम सांस तक लड़ेंगे।
कुसमुंडा,गेवरा,दीपका खदान से प्रभावित भू विस्थापित किसानों की बैठक कुसमुंडा में हुई जिसमें तीनों खदान को बंद कर हड़ताल सफल बनाने की रणनीति तैयार की गई
