*धरमजयगढ़ : सुशासन की नाक के नीचे ‘धान का बड़ा खेल’, क्या भ्रष्टाचार ही अधिकारियों का नया ‘ईमान’ है?…*

*धरमजयगढ़ : सुशासन की नाक के नीचे ‘धान का बड़ा खेल’, क्या भ्रष्टाचार ही अधिकारियों का नया ‘ईमान’ है?…*

हमर छत्तीसगढ़ न्यूज नारायण राठौर

 

धरमजयगढ़/-  छत्तीसगढ़ की साय सरकार प्रदेश में ‘सुशासन’ का दावा कर रही है, लेकिन धरमजयगढ़ के लापरवाह और भ्रष्ट तंत्र ने जैसे इस दावे की हवा निकालने की कसम खा ली है। धान खरीदी में पारदर्शिता के सरकारी दावों को ठेंगा दिखाते हुए यहाँ एक ऐसा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बेखौफ जालसाज : दूसरे की जमीन, अपना पंजीयन !

ताजा मामला दुर्गापुर धान उपार्जन केंद्र का है, जहाँ भ्रष्टाचार की जड़ें काफी गहरी नजर आ रही हैं। ग्राम उदउदा निवासी महेंद्र यादव (पिता रामचरण यादव) पर आरोप है कि उसने राजस्व और समिति के अधिकारियों की मिलीभगत से आदिवासियों (मझवारों) की जमीन का फर्जी तरीके से अपने नाम पर पंजीयन करा लिया और धड़ल्ले से धान बेचकर शासन लाखों का चूना लगाया।

जांच के घेरे में ‘मिलीभगत’ का खेल – पंजीयन दस्तावेजों के अनुसार, महेंद्र यादव ने राजू पिता मोहित मझवार और तिलासो पति अमरसाय के नाम पर आवंटित वन अधिकार पट्टा (खसरा नंबर 927/10 और 452/4) का उपयोग कर धान खपाया है। सवाल यह उठता है किः

क्या बिना अधिकारियों के संरक्षण के यह फर्जीवाड़ा संभव था?

पंजीयन के समय क्या पटवारी और संबंधित कर्मचारियों की आंखों पर पट्टी बंधी थी?

बिना स्थलीय सत्यापन और दस्तावेजों की जांच के एक रसूखदार व्यक्ति को दूसरे की जमीन पर धान बेचने की अनुमति कैसे मिल गई?

शिकायत की ‘कब्रगाह’ बने सरकारी दफ्तर हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर फर्जीवाड़े की शिकायत तहसीलदार धरमजयगढ़ से लेकर कलेक्टर जनदर्शन तक में की गई है (सुरक्षा क्रमांक- 224, दिनांक 02/03/2026)। लेकिन हफ्तों बीत जाने के बाद भी फाइलें धूल फांक रही हैं। अधिकारियों की यह ‘चुप्पी’ भ्रष्टाचार में उनकी मौन सहमति की ओर इशारा कर रही है।

अब ‘बगिया’ (मुख्यमंत्री निवास) में होगा न्याय का आह्वान – स्थानीय अधिकारियों के ढुलमुल रवैये और भ्रष्टाचार को संरक्षण देने की नीति से तंग आकर अब शिकायतकर्ता ने सीधे मुख्यमंत्री आवास (बगिया) का दरवाजा खटखटाने का मन बना लिया है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि अगर धरमजयगढ़ में न्याय नहीं मिला, तो मुख्यमंत्री के पास जाकर इस पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया जाएगा।

क्या जिला प्रशासन इस फर्जीवाड़े की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को जेल भेजेगा, या फिर धरमजयगढ़ में इसी तरह ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ का खेल चलता रहेगा? जनता की नजरें अब मुख्यमंत्री की कार्रवाई और कलेक्टर के अगले कदम पर टिकी हैं।