*बिलासपुर की विदुषी डॉ. पुष्पा दीक्षित को कर्नाटक संस्कृत विश्वविद्यालय से डी.लिट् की मानद उपाधि*
*उनके शैक्षणिक जीवन की चौथी उपाधि*
हमर छत्तीसगढ़ न्यूज नारायण राठौर
बिलासपुर । संस्कृत जगत की प्रख्यात विदुषी डॉ. पुष्पा दीक्षित को 7 अप्रैल 2026 को कर्नाटक संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा डी.लिट् (Doctor of Literature) की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। यह उनके शैक्षणिक जीवन की चौथी मानद उपाधि है, जिससे पूरे देश में उनके योगदान को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है।
उक्त जानकारी देते हुये संस्था के सचिव चन्द्र प्रकाश बाजपेयी ने बतलाया कि इससे पूर्व उन्हें उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा “महामहोपाध्याया” की उपाधि, राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान द्वारा “वाचस्पति” तथा अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय द्वारा डी.लिट् की मानद उपाधि प्रदान की जा चुकी है।
*संस्कृत सेवा में जीवन समर्पित*
डॉ. पुष्पा दीक्षित, जिन्हें श्रद्धा से “माताजी” के नाम से भी जाना जाता है, संस्कृत व्याकरण की अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विदुषी हैं। उनका जन्म मध्यप्रदेश के जबलपुर में हुआ और उन्होंने संस्कृत विषय में स्नातकोत्तर में तीन स्वर्ण पदक प्राप्त किए। बाद में उन्होंने पीएचडी की उपाधि हासिल की।
वे बिलासपुर स्थित शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय में संस्कृत विभागाध्यक्ष रहीं और लगभग चार दशकों तक अध्यापन कार्य किया।
*“पौष्पी प्रक्रिया’ से संस्कृत शिक्षा में क्रांति”*
डॉ. दीक्षित ने पाणिनीय व्याकरण को सरल बनाने के लिए “पौष्पी प्रक्रिया” नामक अभिनव पद्धति विकसित की है, जिससे जटिल संस्कृत व्याकरण को कम समय में समझना संभव हो गया है।
वे बिलासपुर में “पाणिनीय शोध संस्थान” की अध्यक्षा हैं, जहां देश-विदेश से विद्यार्थी आकर निःशुल्क संस्कृत अध्ययन करते है।
*राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान*
डॉ. दीक्षित ने न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी संस्कृत का प्रतिनिधित्व किया है। वे विश्व संस्कृत सम्मेलन (एडिनबरा) में चयनित 15 प्रमुख संस्कृत कवियों में शामिल रही हैं।
उन्हें भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम द्वारा 2004 में “Certificate of Honour” से भी सम्मानित किया गया था।
समाज के लिए निरंतर योगदान
84 वर्ष की आयु में भी डॉ. दीक्षित संस्कृत के प्रचार-प्रसार में सक्रिय हैं। वे निःशुल्क कक्षाओं, प्रवचनों और कार्यशालाओं के माध्यम से संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य कर रही हैं।
*गौरव का क्षण*
श्री बाजपेयी ने बतलाया कर्नाटक संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान की गई यह नवीन डी.लिट् उपाधि न केवल डॉ. पुष्पा दीक्षित के दीर्घकालीन शैक्षणिक योगदान का सम्मान है, बल्कि यह संस्कृत भाषा और भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनर्जागरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत भी माना जा रहा है। चन्द्र प्रकाश बाजपेयी ने बतलाया कि वो छत्तीसगढ़ राज्य की इकलौती चौथी बार डीलिट मानद उपाधि प्राप्त विदुषी है । उनके आज नगर आगमन पर गण मान्य जन संस्था के विद्यार्थी,परिवार जनो ने स्वागत किया उन्होंने बतलाया अतिशीघ्र बड़े आयोजन में सम्मानित किया जाएगा ।
प्रति,दैनिक पत्रकार प्रकाशन हेतु
(चन्द्र प्रकाश बाजपेयी पूर्व विधायक)
सचिव पाणनीय शोध संस्थान बिलासपुर
