*संगीतमय राधा अष्टमी और नंदोत्सव का हुआ आयोजन*
हमर छत्तीसगढ़ न्यूज नारायण राठौर
सक्ती / श्री राधा अष्टमी के अवसर पर हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे के जिलाध्यक्ष अर्जुन राठौर ने अपने श्री श्याम निवास पर श्री राधा जनोत्सव और नंदोत्सव भागवताचार्य पंडित उत्तम मिश्रा के द्वारा संगीतमय श्री जी के जन्म का विस्तार से वर्णन किया गया आचार्य जी ने श्री राधा रानी के अन्य लीलाओं का बहुत ही सुंदर ढंग से कथा श्रवण कराया और कहा कि जब-जब धरती पर पाप अत्याचार अधिक होता है तो देवियों का अवतार लेकर के धर्म की स्थापना के लिए धरती पर आते हैं ठीक इसी तरह धरती से पाप को बाहर उतारने के लिए श्री राधा रानी के रूप में अवतार लिए ब्यास आचार्य जी ने कथा कि शुभारंभ कृष्ण जी के जन्म के बारे में बतलाए की भगवान का जन्म कारागृह में भाद्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अर्धरात्रि के समय कारागृह में माता देवकी के आठवें पुत्र के रूप में प्रकट हुए महाराज जी ने माखन चोरी लीला का विस्तार से वर्णन किया भगवान श्री कृष्ण की माखन चोरी लीला एक अद्भुत प्रेम लीला है और आगे महाराज जी ने अन्य राक्षसों के वध के बारे में बकासुर और पूतना का दुध और विष और प्राण पीकर उसका वध की कथा विस्तार से श्रवण कराया आगे भगवान श्री कृष्ण जी कुछ समय गोकुल में लीला की और उसके बाद वृंदावन में भगवान ने अनेक लीला किया वृंदावन भगवान कि लीला स्थल है महाराज जी यह भी बताया की व्रज छोड़कर के भगवान श्री कृष्णा मथुरा में प्रवेश की कुब्जा का भी उद्धार किया और कंस जैसे अत्याचारी महा पापी का वध करके धरती को पाप के बाहर से उतारा और भगवान श्री कृष्ण के अन्य लीलाओं का वर्णन गोवर्धन लीला एवं कान्हा जी की पुरी बाल लीला से लेकर कंस वध और भगवान की जन्मस्थली से लेकर द्वारकापुरी में पहुंचकर एक गरीब निर्धन ब्राह्मण जो कृष्ण जी के परम सखा सुदामा चरित्र का विस्तार से वर्णन किया ब्यास महराज ने श्री राधा रानी के प्रगट होने की कथा विस्तार से बतलाते हुये कहा की यमुना तट और स्वर्ण कमल: पौराणिक कथा के अनुसार, राजा वृषभानु एक बार यज्ञ के लिए भूमि की सफाई कर रहे थे। वहीं दूसरी कथा के अनुसार वे दैनिक स्नान के लिए यमुना नदी के तट पर गए थे, जहां उन्हें पानी की सतह पर एक सुंदर स्वर्ण कमल तैरता हुआ दिखाई दिया।
कमल में कन्या: जब राजा वृषभानु उस स्वर्ण कमल के पास गए, तो उन्होंने देखा कि उसकी पंखुड़ियों के बीच एक अत्यंत मनोहारी और तेजोमय कन्या लेटी हुई है।
पूर्व का वरदान: मान्यता है कि वृषभानु जी और उनकी पत्नी कीर्तिदा (कीर्ति देवी) ने पूर्व जन्म में भगवान विष्णु और महालक्ष्मी को अपनी संतान के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उसी तपस्या के फलस्वरूप महालक्ष्मी का अवतार श्री राधा रानी के रूप में प्रकट हुईं। राजा वृषभानु उस कन्या को अपने घर ले आए और अपनी पुत्री मानकर उनका पालन-पोषण करने लगे।
आंखें खोलने का रहस्य
श्रीकृष्ण दर्शन: कहा जाता है कि प्राकट्य के समय श्री राधा रानी ने अपनी आंखें बंद रखी थीं। जब बाल रूप में श्रीकृष्ण उनके पास आए और उनके चरणों को स्पर्श किया, तब राधारानी ने पहली बार अपनी आंखें खोलीं और सबसे पहले कान्हा के दर्शन किए।और महराज जी ने बतलाया कि किस प्रकार गोकुल में श्री कृष्ण के अवतरण में नन्द बाबा ने 1माह तक उत्सव मनाया उसी प्रकार से श्याम निवास जेठा में गोकुल जैसे उत्सव मनाया जा रहा है
कार्यक्रम का विश्राम श्री राधा रानी जी के जन्मोत्सव पर केक काटकर बड़ी धूमधाम से झूमकर नृत्य करते हुये मनाया गया इस कार्यक्रम में विशेष रूप से शक्ति रियासत के राजा धर्मेंद्र सिंह ,सक्ति के पूर्व मंडी अध्यक्ष देवेंद्र नाथ अग्निहोत्री,अन्नपूर्णा परिवार बाराद्वार पिंकी जितेश शर्मा ,महेश शर्मा ,जिला पंचायत सभापति,आयुष शर्मा,कन्नौजिया राठौर समाज के अध्यक्ष हेमचंद राठौर ,महासचिव डॉ राधवेंद्र राठौर,एवं ग्राम पंचायत दूरपा के पूर्व सरपंच परमेश्वर यादव और छेत्र के सभी भक्तगण ग्राम जेठा भूरसीडीह आस पास के प्रतिष्ठित माता बहने और नौजवान साथीयो सैकड़ो की संख्या में उपस्थित रहे
