*न्याय की जीत: पलारी में स्कूली छात्राओं से छेड़छाड़ करने वाले शिक्षक को 6 वर्ष का कठोर कारावास, पॉक्सो कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला*
हमर छत्तीसगढ़ न्यूज नारायण राठौर
बलौदाबाजार/- मासूम नौनिहालों के भविष्य को गढ़ने और उन्हें संस्कारित करने का जिम्मा जिनके कंधों पर था, जब वही रक्षक भक्षक बन जाएं, तो समाज की नींव को झकझोर देने वाली ऐसी घटनाओं पर कानून का कड़ा प्रहार अत्यंत आवश्यक हो जाता है। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर अपनाई गई ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि खाकी की मजबूत विवेचना और न्यायपालिका के कड़े रुख से अपराधियों का बचना असंभव है।”
क्या था पूरा मामला: जब गुरु की मर्यादा हुई तार-तार
यह संवेदनशील मामला बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के थाना पलारी क्षेत्र अंतर्गत स्थित एक शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला का है। मंदिर कहे जाने वाले शिक्षण संस्थान की पवित्रता को कलंकित करते हुए यहाँ पदस्थ आरोपी शिक्षक तिलक राम वर्मा द्वारा स्कूल की नाबालिग छात्राओं के साथ लगातार बुरी नीयत से अश्लील हरकतें और छेड़छाड़ की जा रही थी।
जब पीड़ित मासूमों ने अपने साथ हो रहे इस घृणित कृत्य का विरोध किया और घर पर आपबीती सुनाई, तो परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। बिना एक पल गंवाए, दिनांक 10 फरवरी 2025 को प्रार्थिया ने थाना पलारी में पहुँचकर आरोपी शिक्षक के खिलाफ लिखित रिपोर्ट दर्ज कराई।
त्वरित पुलिस कार्रवाई और वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन
मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को भांपते हुए बलौदाबाजार-भाटापारा पुलिस ने तत्काल सक्रियता दिखाई। पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन और पलारी पुलिस की त्वरित कार्रवाई के मुख्य बिंदु इस प्रकार रहे:
तत्काल पंजीयन एवं गिरफ्तारी: थाना पलारी में अपराध क्रमांक 58/2025, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74, 75(1) एवं पॉक्सो एक्ट की धारा 8, 9(f) के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया। पुलिस ने बिना देर किए घटना दिवस 10.02.2025 को ही आरोपी शिक्षक को विधिवत गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया।
*वैज्ञानिक एवं साक्ष्य-आधारित विवेचना:* मामले के जांच अधिकारी, सहायक उप निरीक्षक राजेश सेन द्वारा घटनास्थल का बारीकी से नक्शा तैयार किया गया। पीड़िताओं के माननीय न्यायालय/सक्षम प्राधिकारी के समक्ष कथन (धारा 183 B.N.S.S.) दर्ज कराए गए।
गंभीर धाराओं का विस्तार: विवेचना के दौरान साक्ष्यों के आधार पर प्रकरण में अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2)(v) का भी समावेश किया गया। पीड़िताओं की आयु की अकाट्य पुष्टि हेतु विद्यालय का दाखिल-खारिज रजिस्टर जब्त किया गया।
समयबद्ध अभियोग पत्र: पुलिस ने अपनी पेशेवर दक्षता का परिचय देते हुए तमाम वैज्ञानिक, चिकित्सकीय और स्वतंत्र साक्ष्यों को समेटते हुए मात्र कुछ ही हफ्तों के भीतर दिनांक 05 अप्रैल 2025 को माननीय न्यायालय में चालान (अभियोग पत्र) प्रस्तुत कर दिया।
*माननीय न्यायालय का कड़ा दण्डादेश: 6 वर्ष का कठोर कारावास*
माननीय विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) बलौदाबाजार गिर्जेश प्रताप सिंह की अदालत में चले इस बहुचर्चित प्रकरण में अभियोजन पक्ष और पुलिस की प्रभावी पैरवी रंग लाई। माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 30 अक्टूबर 2026 को ऐतिहासिक निर्णय पारित करते हुए आरोपी शिक्षक को दोषी करार दिया गया।
*दोषसिद्ध आरोपी का विवरण:*
नाम: तिलक राम वर्मा (पिता: मोतीलाल वर्मा)
आयु: 55 वर्ष
मूल निवासी: ग्राम सरसेनी, थाना सुहेला
वर्तमान निवास: बघेल कॉलोनी पलारी, थाना पलारी
न्यायालय द्वारा सुनाई गई सजा का विवरण:
धारा 74 BNS (09 बार): 02 वर्ष का सश्रम कारावास एवं ₹500/- प्रति अर्थदंड (कुल ₹4,500), राशि अदा न करने पर 01 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास।
धारा 09(f)/10 पॉक्सो एक्ट (09 बार): 06 वर्ष का सश्रम कारावास एवं ₹1000/- प्रति अर्थदंड (कुल ₹9,000), राशि अदा न करने पर 03 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास।
(विशेष नोट: माननीय न्यायालय के निर्देशानुसार आरोपी पर अधिरोपित समस्त सजाएं साथ-साथ चलेंगी)
*समाज के लिए एक कड़ा संदेश*
बलौदाबाजार-भाटापारा पुलिस की सूक्ष्म विवेचना, समय पर साक्ष्यों का संकलन और अभियोजन की शानदार पैरवी के परिणामस्वरूप मिले इस त्वरित न्याय से जिले के आम नागरिकों, अभिभावकों और विशेषकर महिलाओं में सुरक्षा की भावना और अधिक सुदृढ़ हुई है। यह फैसला उन तमाम असामाजिक तत्वों और अपराधियों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है जो समाज की बालिकाओं के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने का दुस्साहस करते हैं।
बलौदाबाजार-भाटापारा पुलिस ने क्षेत्रवासियों से अपील की है कि बच्चों के विरुद्ध होने वाले किसी भी प्रकार के अपराध या संदिग्ध व्यवहार की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, ताकि हर बेटी को सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण मिल सके।
