*किसान संघ ने तहसीलदारों को मुख्यमंत्री के नाम से सौंपा ज्ञापन*
*किसानों को खाद-बीज की संपूर्ण व निर्बाध आपूर्ति हो*
हमर छत्तीसगढ़ न्यूज नारायण राठौर
सक्ती /- किसान संघ के जिला अध्यक्ष रमाकांत चंद्रा के नेतृत्व में भारतीय किसान संघ ने किसानों को खाद एवं बीज की संपूर्ण एवं निर्बाध आपूर्ति हेतु जिले के समस्त तहसीलदारों को मुख्यमंत्री के नाम पर ज्ञापन सौंपा गया है। जिसमें किसानों की विभिन्न जरूरी मांग को करते हुए जल्द ही मांग पूरा करने की मांग की गई है। पत्र के माध्यम से किसान हित में मांग बताया गया है कि देश में आए संकट को भारतीय किसान संघ गंभीरता से समझ रहा है। संकट की इस घड़ी में किसान भी देश के साथ खड़ा है। अन्नदाता होने के कारण सबका पेट भरने का दायित्व किसान का है, परंतु फसल उगाने के लिए जिन कृषि आदानों की आवश्यकता होती है, वह तो लगना ही है। खाद की व्यवस्था सरकारें ही करती है यदि खाद की व्यवस्था में कमी होगी तो निश्चित ही फसल पर इसका प्रभाव पड़ेगा और देखें तो किसान की आजीविका कृषि पर ही निर्भर है, यदि उत्पादन कम होता है तो किसान की आर्थिक स्थिति पर प्रभाव पड़ेगा। भारतीय किसान संघ लगातार खाद की कालाबाजारी के विरोध में सरकार को चेताता रहा है, और यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार ने कभी इसे रोकने के ठोस प्रयास नहीं किये हैं। परन्तु अब जब विषम अन्तर्राष्ट्रीय परिस्थितियों का किसानों की जीविका पर सीधा असर पड़ने पर भी किसानों से सहयोग की
अपेक्षा की जा रही है; खाद की कालाबाजारी खुलेआम जारी रहने देना अक्षम्य है। बताया गया है की प्रदेश में खाद एवं बीज की किसी भी प्रकार की कमी न होने पाए। भारतीय किसान संघ एक जिम्मेदार संगठन है यदि किसान हित पर कोई भी आंच आती है तो किसान संघ भविष्य में बड़ा आंदोलन करने के लिये बाध्य होगा। जिसमें भारतीय किसान संघ की मांगें है समितियों में पर्याप्त खाद की व्यवस्था की जाए,
किसानों को एक बोरी डीएपी एवं दो बोरी यूरिया दिया जाए। सभी निजी खाद विक्रेताओं पर दबाव बनाकर सही मूल्य में किसानों को खाद उपलब्ध करवाई जाए। अधिक मूल्य में खाद विक्रय करने वाले सभी विक्रेताओं पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। एग्रीस्टैक में पंजीकृत सभी किसानों को समितियों में नगद में खाद देने की व्यवस्था की जाए। नैनो उर्वरकों के प्रयोग की सही जानकारी का अभाव एवं इन उर्वरकों की वर्षा के प्रति अतिसंवेदनशीलता को देखते हुये, इन उर्वरकों के प्रयोग में विफलता की संभावना बढ़ जाती है। अतः प्रति किसान दिये जाने वाले नैनो डीएपी एवं नैनो युरिया की कीमत घटाकर मात्रा को दुगना किया जाए। वही किसानों को कृषि कार्य के लिये डीजल, कंटेनर, जेरीकैन में भी दिया जाय। गुणवत्तापूर्ण बीजों का भंडारण समितियों में करवाया जाए। हरी खाद के लिए ढेचा, सन, मूंग आदि के बीजों को सस्ती दर में उपलब्ध करवाया जाए।

