*CSR के नाम पर बालको क्षेत्र की महिलाओं के शोषण का आरोप, जन अधिकार समिति ने उठाई आवाज*

*CSR के नाम पर बालको क्षेत्र की महिलाओं के शोषण का आरोप, जन अधिकार समिति ने उठाई आवाज*

कोरबा जिला रिपोर्टर राजेंद्र दास

कोरबा। बालको क्षेत्र की स्थानीय महिलाओं के साथ CSR गतिविधियों के नाम पर कथित तौर पर कम मेहनताना और भुगतान में देरी का मामला सामने आया है। बालको जन अधिकार समिति द्वारा विभिन्न वार्डों में महिलाओं के साथ आयोजित बैठकों में कई गंभीर शिकायतें सामने आने का दावा किया गया है।

समिति के अनुसार, महिलाओं ने बताया कि पेटीकोट सिलाई के लिए महज 5 रुपये तथा बाती बनाने के लिए 1–2 रुपये तक का भुगतान किया जाता है। वहीं, मशरूम उत्पादन जैसी कुछ योजनाओं से भी महिलाओं को स्थायी आमदनी नहीं हो पाने की शिकायत सामने आई है। कुछ महिलाओं ने भुगतान लंबे समय तक लंबित रहने की बात भी कही है।

बालको जन अधिकार समिति ने मांग की है कि स्थानीय महिलाओं को उनके काम का सम्मानजनक और समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही महिलाओं को आवश्यक मशीनें, कच्चा माल और अन्य संसाधन उपलब्ध कराए जाएँ, ताकि वे घर से उत्पादन कर नियमित आय अर्जित कर सकें।

समिति का कहना है कि यदि कंपनी वास्तव में महिला सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है, तो महिलाओं के लिए नियमित आय के अवसर और रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। समिति ने बालको प्लांट में स्थानीय महिलाओं को रोजगार के अवसर देने की मांग भी उठाई है।

समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि CSR केवल प्रचार का माध्यम नहीं, बल्कि स्थानीय महिलाओं और पूरे क्षेत्र के वास्तविक विकास का साधन होना चाहिए। बालको जन अधिकार समिति ने स्पष्ट किया कि वह स्थानीय महिलाओं के सम्मान, रोजगार और अधिकारों की आवाज आगे भी मजबूती से उठाती रहेगी।