*भारतीय किसान संघ के द्वारा आज एकदिवसीय धरना प्रदर्शन एवं कलेक्ट्रेट घेराव किया गया*
हमर छत्तीसगढ़ न्यूज नारायण राठौर
सक्ती/ गाय और किसान केवल छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान का भाग ही नहीं हैं, ये राज्य और देश के भविष्य की पूंजी है। देश की आत्मनिर्भरता और समृद्धि गायों और किसानों के विकास के बिना संभव ही नहीं है। परंतु दुर्भाग्य की बात है कि कृषि प्रधान होने पर गर्व करने वाले हमारे राज्य में दोनों को ही भारी उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है। किसानों को उनके उत्पादों अथवा भूमि की सही कीमत नहीं दी जा रही है। मनमाने तरीके से धान खरीदी के नियमों में बदलाव करके किसानों को उनकी फसल बेचने से रोकने के प्रयास किये जा रहे हैं। लगातार बंजर होती जा रही भूमि के बचाव के लिये गौ आधारित जैविक खेती एक सहज उपाय है; परन्तु सरकार द्वारा रासायनिक खेती को ही लगातार बढ़ावा दिये जाने के कारण आज किसान पारंपरिक गौ आधारित खेती ही नहीं बल्कि गौ पालन से भी विमुख होते जा रहे हैं।
इन सभी समस्याओं के परिपेक्ष्य में किसानों की कुछ प्रमुख मांगें इस प्रकार है।
1. भारतीय किसान संघ द्वारा गोवंदन योजना पर प्रस्ताव (संलग्न) पारित किया गया है, उसे प्रदेश में लागू किया जाए एवं जी-राम-जी योजना को गौ संरक्षण एवं गौ संवर्धन से जोड़ा जाए।
2. धान खरीदी की 2022-23 की किसानों की रुकी हुई ₹1700 करोड़ की राशि किसानों को तत्काल प्रदान की जाए।
3. खेती की लागत लगातार बढ़ती ही जा रही है। केन्द्र सरकार ने इस आधार पर प्रतिवर्ष धान के समर्थन मूल्य में वृद्धि भी की है। परन्तु राज्य सरकार ने यह लाभ किसानों को हस्तान्तरित न करते हुये धान के खरीदी मूल्य में पिछले 3 वर्षों में कोई बदलाव नहीं किया है, जिसके कारण किसानों की आय बढ़ने की बजाय घटती जा रही है। अतः केन्द्र सरकार द्वारा पिछले 3 वर्षों में की गयी ₹258 (117+69+72) की वृद्धि का लाभ किसानों को देते हुये ₹3358 में धान खरीदी की जाय। सब्जी एवं फलों की खेती करने वाले किसानों को भी कृषक उन्नति योजना में जोड़ा जाए।
4. धान खरीदी 15 नवंबर से 15 फरवरी तक की जाए। किसानों के साथ अन्याय न हो इसलिये धान खरीदी में प्रति तौल अधिकतम 40 किलो 700 ग्राम लेने का शासन की ओर से आदेश भी जारी किया जाए। यह चिन्तनीय है कि माननीय श्री गजेन्द्र यादव जी, केबिनेट मंत्री छत्तीसगढ़ शासन, द्वारा 13 अक्टूबर 2025 को भारतीय किसान संघ के मंच से हजारों किसानों और प्रेस के समक्ष घोषणा करने के नाद भी इसका आदेश जारी नहीं किया गया है।
5. हाल ही में आयी हुई बाढ़ के कारण पूरे प्रदेश में किसानों की फसलों की भारी हानि हुई है। शासन तत्काल सर्वे कर किसानों की क्षतिपूर्ति की उचित व्यवस्था करे।
6. धान खरीदी में टोकन व्यवस्था में सुधार किया जाए। बड़े किसानों को पांच टोकन एवं लघु एवं सीमांत किसानों को क्रमशः तीन व दो टोकन दिया जाए। थान खरीदी के समय अनावश्यक दबाव डालकर खाता समर्पण कराने की प्रक्रिया बंद की जाए।
7. गन्ना फसल के मूल्य में ₹150 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की जाय एवं इसे कृषक उन्नति योजना में जोड़ा जाए।
8. अरपा-भैसाझार जैसी अन्य सभी अधूरी सिंचाई परियोजनाओं में गति लाई जाए एवं पैरी हाईडैम जैसी नई परियोजनाएं जिनमें सिंचाई की बहुत अधिक संभावनाएं हैं, उन्हें तत्काल स्वीकृत किया जाए।
9. विद्युत विभाग के निजीकरण पर रोक लगाई जाए।
10. बाजार में अधिक मूल्य पर खाद विक्रय करने पर रोक लगाई जाए एवं ऐसे विक्रेताओं पर कड़ी कारवाई की जाए।
11 भूमि अधिग्रहण में भारतीय किसान संघ के आयाम भारतीय एग्रो इकोनोमिक रिसर्च सेंटर द्वारा जारी किये गये उदयपुर डिक्लेरेशन (संलग्न) के अनुसार कार्य किया जाए।
– 12. रबी में जल संरक्षण की दृष्टि से थान उत्पादन को हतोत्साहित करने के लिये और वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने के लिये मक्के और गेहूं की भी खरीदी समर्थन मूल्य पर की जाय।
13. ग्राम भुतहा में तहसील मालखरौदा जिला सत्ती में एक नया सेवा सहकारी समिति केंद्र स्वीकृत प्रदान किया जावे, समस्त दस्तावेज सलंग्न है।
इस अवसर पर भारतीय किसान संघ जिला अध्यक्ष रमाकांत चंद्रा, उपाध्यक्ष हीरामणि वर्मा,मंत्री वेद प्रकाश, अडभार अध्यक्ष तिजू राम, अडभार मंत्री रवि शंकर चंद्रा,सक्ती अध्यक्ष योगेंद्र, मंत्री जगमोहन राठौर, जैजैपुर अध्यक्ष ध्वजालाल चंद्रा, हसौद अध्यक्ष लक्ष्मी प्रसाद चंद्रा, डभरा अध्यक्ष मोहर चंद्रा, सुरेंद्र राठौर, रामाधार चंद्रा, शिवचरण यादव, श्याम लाल विद्युत प्रमुख, खगेश्वर गबेल, निरंजन चंद्रा, सेतराम चंद्रा, रतनलाल चंद्रा, गौरी शंकर चंद्रा, सहित अनेक महिलाएं जैसे लक्ष्मीबाई, रामेश्वरी, संतोषी, भारतीय किसान संघ जिला सक्ती के अनेक किसान एवं महिलाएं उपस्थित रहे।