*जिला पंचायत सक्ती में फाइलों पर ‘कुंडली’ मारकर बैठे बाबू, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की कछुआ चाल से सरपंच परेशान*
हमर छत्तीसगढ़ न्यूज नारायण राठौर
सक्ती। जिला पंचायत सक्ती के स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) विभाग में पदस्थ बाबुओं का ढर्रा सुधरने का नाम नहीं ले रहा है। कार्यालय में महीनों तक फाइलें दबाकर रखने के रवैये से ग्रामीण क्षेत्रों के सरपंच और जनप्रतिनिधि बेहद परेशान हैं। शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं की फाइलें एक मेज से दूसरी मेज तक पहुंचने में महीनों का समय ले रही हैं, जिससे ग्रामीण विकास के कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं।
महीनों चक्कर काटने को मजबूर हैं सरपंच
ग्रामीण क्षेत्रों को ओडीएफ प्लस (ODF Plus) और स्वच्छ बनाने के दावों के बीच, धरातल पर स्थिति बिल्कुल उलट है। नाम न छापने की शर्त पर कई सरपंचों ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत सामुदायिक स्वच्छता परिसर (CSC), सोखता गड्ढा निर्माण और कचरा प्रबंधन (SLWM) जैसे जरूरी कार्यों की फाइलें जिला पंचायत में धूल खा रही हैं। बाबुओं द्वारा कभी दस्तावेज़ों की कमी तो कभी बड़े साहब की व्यस्तता का बहाना बनाकर फाइलों को लटकाया जा रहा है। एक अदद दस्तखत और स्वीकृति के लिए सरपंचों को हर हफ्ते जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे उनका समय और पंचायत का पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है।
विकास कार्य ठप, ग्रामीणों में भारी आक्रोश
सरपंचों का कहना है कि गांवों में स्वच्छता से जुड़े कार्यों की स्वीकृति न मिलने के कारण ग्रामीण उनसे जवाब मांग रहे हैं। बारिश और त्योहारों के सीजन में भी कई गांवों में स्वच्छता संबंधी बुनियादी काम रुके हुए हैं। बाबुओं के इस नकारात्मक और टालमटोल वाले रवैये के कारण जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश पनप रहा है।
उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग
परेशान सरपंचों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने जिला पंचायत सीईओ और कलेक्टर से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) शाखा के बाबुओं के पास लंबित सभी फाइलों की समीक्षा की जाए और लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाएं समय पर मिल सकें।
