एक अधिकारी, तीन कार्यालय और करोड़ों की योजनाएं — आखिर कैसे हो रही प्रभावी निगरानी?

एक अधिकारी, तीन कार्यालय और करोड़ों की योजनाएं — आखिर कैसे हो रही प्रभावी निगरानी?

बिलाईगढ़, कोसीर और भटगांव का प्रभार एक अधिकारी के पास, विभागीय कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में!

 

सारंगढ़-बिलाईगढ़ :- जिले के महिला एवं बाल विकास विभाग अंतर्गत संचालित एकीकृत बाल विकास परियोजनाओं की प्रशासनिक व्यवस्था अब गंभीर सवालों के घेरे में दिखाई देने लगी है। विभागीय जानकारी के अनुसार एकीकृत बाल विकास परियोजना बिलाईगढ़ में पदस्थ परियोजना अधिकारी श्री तेजस्वी ध्रुव वर्ष 2019 से लगातार लगभग सात वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं। इतना ही नहीं, उन्हें परियोजना बिलाईगढ़ के साथ-साथ परियोजना कोसीर एवं परियोजना भटगांव का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। इस प्रकार जिले की तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं का संचालन वर्तमान में एक ही अधिकारी के अधीन संचालित होना प्रशासनिक हलकों में चर्चा और संदेह का विषय बन गया है।
महिला एवं बाल विकास विभाग जैसी संवेदनशील व्यवस्था में आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन, पोषण आहार वितरण, हितग्राहियों का सत्यापन, वित्तीय व्यय, निरीक्षण कार्यवाही, विभागीय अनुश्रवण, निर्माण एवं खरीदी संबंधी प्रक्रियाएं, कर्मचारियों की निगरानी तथा शासन की विभिन्न योजनाओं का क्रियान्वयन शामिल रहता है। ऐसे में एक ही अधिकारी के पास लगातार वर्षों से बहु-परियोजना प्रभार बने रहना केवल प्रशासनिक दबाव का विषय नहीं, बल्कि व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा करता दिखाई दे रहा है।
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि सामान्यतः अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था अस्थायी परिस्थितियों में सीमित अवधि के लिए दी जाती है, किंतु लंबे समय तक एक ही अधिकारी के पास कई परियोजनाओं का नियंत्रण रहना कई प्रकार की आशंकाओं को जन्म देता है। विभागीय स्तर पर यह चर्चा भी तेज है कि जब एक अधिकारी को तीन अलग-अलग परियोजनाओं के प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार प्राप्त हों, तब कार्यों की निष्पक्ष निगरानी एवं स्वतंत्र परीक्षण की व्यवस्था स्वतः कमजोर पड़ सकती है। इससे योजनाओं के संचालन, व्यय प्रक्रिया, फाइल संधारण, निरीक्षण रिपोर्ट एवं विभागीय नियंत्रण प्रणाली को लेकर भी संदेह उत्पन्न होना स्वाभाविक माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार विभागीय कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रशासनिक संतुलन एवं स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था आवश्यक मानी जाती है, किंतु वर्तमान व्यवस्था में एक ही अधिकारी के पास लगातार बहु-परियोजना नियंत्रण होने से कई प्रकार की प्रशासनिक विसंगतियों की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि अब विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज होने लगी हैं तथा लोग यह सवाल उठाने लगे हैं कि आखिर ऐसी कौन-सी प्रशासनिक मजबूरी है, जिसके चलते वर्षों से एक ही अधिकारी को लगातार तीन-तीन परियोजनाओं का प्रभार सौंपा गया है।
विशेष रूप से परियोजना भटगांव को लेकर प्रशासनिक पुनर्व्यवस्था की मांग उठ रही है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि परियोजना भटगांव का स्वतंत्र प्रभार स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों — जैसे डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार अथवा नायब तहसीलदार भटगांव — को सौंपा जाना चाहिए, ताकि विभागीय कार्यों की निगरानी, समीक्षा एवं जवाबदेही अधिक प्रभावी रूप से सुनिश्चित हो सके। उनका मानना है कि अलग-अलग अधिकारियों के माध्यम से परियोजनाओं का संचालन होने पर प्रशासनिक पारदर्शिता एवं नियंत्रण प्रणाली अधिक मजबूत हो सकती है। अब यह विषय केवल अतिरिक्त प्रभार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि विभागीय कार्यों की निष्पक्षता, पारदर्शिता एवं प्रशासनिक विश्वसनीयता से भी जुड़ता दिखाई दे रहा है। ऐसे में जिला प्रशासन एवं महिला एवं बाल विकास विभाग से यह अपेक्षा की जा रही है कि मामले का गंभीरता से परीक्षण कर प्रशासनिक दृष्टि से संतुलित एवं पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता अथवा प्रशासनिक संदेह की स्थिति उत्पन्न न हो।