*जहाँ तकनीकी व रोजगार सहायक तैनात, केवल वहीं स्वीकृत हो रहे काम; जिला सक्ती की अन्य पंचायतें विकास से वंचित*
हमर छत्तीसगढ़ न्यूज नारायण राठौर
सक्ती/सक्ती जिले के जनपद पंचायत जैजैपुर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों में ग्रामीण विकास कार्यों की तकनीकी और प्रशासनिक स्वीकृति में भारी पक्षपात और बड़ा खेल सामने आ रहा है। ‘जी राम जी’ (VB-G RAM G) योजना के तहत पूरे जैजैपुर ब्लॉक की सभी पंचायतों में समान रूप से विकास कार्य स्वीकृत होने चाहिए, लेकिन मैदानी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। ब्लॉक में पदस्थ तकनीकी सहायक (TA) और रोजगार सहायक (GRS) मिलकर केवल उन्हीं चुनिंदा ग्राम पंचायतों में ताबड़तोड़ काम स्वीकृत कर रहे हैं जहाँ वे खुद काम करेंगे या इन्ही के वेंडर का बिल लगाएंगे जहाँ उनका सीधा हित है। बाकी की दर्जनों ग्राम पंचायतों के सरपंच और ग्रामीण विकास कार्यों की तकनीकी स्वीकृति (TS) के लिए जनपद कार्यालय जैजैपुर के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी फाइलों पर धूल जम रही है।
जैजैपुर क्षेत्र के स्थानीय सरपंचों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह कोई संयोग नहीं बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है। तकनीकी सहायक और रोजगार सहायक केवल उन्हीं पंचायतों के प्रस्तावों को आगे बढ़ाते हैं जहाँ वे परदे के पीछे से खुद ठेकेदारी कर सकें या जहाँ उन्हें मोटा कमीशन मिल सके। जिन पंचायतों के सरपंच पारदर्शिता से काम कराना चाहते हैं और इन कर्मचारियों की मनमानी के आगे नहीं झुकते, उन पंचायतों में फाइलों में जानबूझकर तकनीकी अड़ंगा लगाकर एक भी नया काम स्वीकृत नहीं होने दिया जा रहा है। हाल ही में कचंदा जैसी पंचायतों में निर्माण कार्यों में हुई अनियमितता और तकनीकी अमले की भूमिका इसका उदाहरण रही है।
सरपंचों की मर्जी ताक पर, सहायकों के पसंदीदा पंचायतों में मेहरबानी
नियमों के अनुसार ग्राम सभा द्वारा पारित ‘विकसित ग्राम पंचायत प्लान’ ही सर्वोपरि है और सरपंच की अनुशंसा पर ही काम स्वीकृत होने चाहिए। परंतु जैजैपुर जनपद में चल रही व्यवस्था में तकनीकी सहायक खुद ही सर्वेक्षक, खुद ही ठेकेदार और खुद ही मंजूरकर्ता बने बैठे हैं। जिस पंचायत में इन कर्मचारियों की सेटिंग है, वहाँ बिना किसी अड़ंगे के रातों-रात फाइलें पास हो जाती हैं। वहीं दूसरी तरफ, जैजैपुर की सुदूर और जरूरतमंद पंचायतों के सरपंचों को बजट और तकनीकी खामियों का बहाना बनाकर टरका दिया जाता है।
जिला पंचायत सीईओ से जांच की मांग, सरपंचों ने दी आंदोलन की चेतावनी
जैजैपुर ब्लॉक के सरपंच संघ और ग्रामीणों ने इस पक्षपातपूर्ण रवैये पर कड़ा रोष जताया है। उनका कहना है कि सरकार ने इन मैदानी अमलों के वेतन-मानदेय के लिए प्रशासनिक खर्च को 6% से बढ़ाकर 9% किया था ताकि सभी पंचायतों को समान तकनीकी सहयोग मिले, न कि किसी एक पंचायत पर विशेष मेहरबानी दिखाई जाए। जनप्रतिनिधियों ने जिला पंचायत सक्ती के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) वासु जैन और जनपद सीईओ जैजैपुर से मांग की है कि पूरे ब्लॉक की पंचायतों में पिछले कुछ महीनों में स्वीकृत हुए कार्यों का निष्पक्ष ऑडिट कराया जाए। इससे साफ हो जाएगा कि किस तरह रोजगार सहायक और तकनीकी सहायक ने मिलकर केवल अपनी पसंदीदा पंचायतों में ही करोड़ों के काम स्वीकृत किए हैं। यदि इस भेदभावपूर्ण स्वीकृति प्रक्रिया पर तुरंत रोक नहीं लगी, तो जैजैपुर ब्लॉक के सरपंच लामबंद होकर जिला मुख्यालय सक्ती का घेराव करेंगे।
