*मनरेगा सामग्री का भुगतान 6 महीने से ठप, जैजैपुर, डभरा, मालखरौदा और सक्ती के सरपंच साहूकारों से परेशान*
*चारों ब्लॉकों में करोड़ों रुपये की राशि अटकी; दुकानदारों के तगादे से जनप्रतिनिधियों की सामाजिक प्रतिष्ठा दांव पर, आंदोलन की चेतावनी*
हमर छत्तीसगढ़ न्यूज नारायण राठौर
सक्ती: जिला सक्ती के अंतर्गत आने वाले चारों विकासखंडों—जैजैपुर, डभरा, मालखरौदा और सक्ती में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत हुए निर्माण कार्यों की सामग्री (मटीरियल) का भुगतान पिछले 6 महीनों से अटका हुआ है। शासन-प्रशासन की इस लेत-लतीफी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के सरपंचों और पंचायत प्रतिनिधियों की मुश्किलें चरम पर पहुंच चुकी हैं।
पंचायतों में नाली निर्माण, आंगनबाड़ी भवन, मुक्तिधाम और पीडीएस गोदाम जैसे महत्वपूर्ण विकास कार्य तो सरपंचों ने आपसी समन्वय से पूरे करा लिए, लेकिन सामग्री की राशि का आवंटन न होने से अब करोड़ों रुपये का क्लेम पेंडिंग पड़ा है। निर्माण कार्य के लिए सीमेंट, ईंट, छड़ और गिट्टी सप्लाई करने वाले साहूकार व दुकानदार अब सरपंचों के घर आकर रोजाना तगादा कर रहे हैं।
साहूकारों के कर्ज के जाल में फंसे सरपंच
जैजैपुर और डभरा,सक्ती ब्लॉक के सरपंचों ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि उन्होंने अपनी व्यक्तिगत गारंटी पर स्थानीय व्यापारियों से सामग्री उठाई थी। अब 6 महीने से भुगतान न होने के कारण व्यापारी उन पर लगातार दबाव बना रहे हैं। मालखरौदा और सक्ती ब्लॉक के कई सरपंचों को साहूकारों का भारी-भरकम ब्याज चुकाने के लिए अपनी निजी संपत्ति तक दांव पर लगानी पड़ रही है। सरपंचों का कहना है कि गांवों में उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा खराब हो रही है और वे मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं।
नए विकास कार्य पूरी तरह से ठप
पुराना बकाया भुगतान नहीं होने के कारण अब सप्लायर्स ने चारों ब्लॉकों की ग्राम पंचायतों में नया सामान उधार देने से साफ मना कर दिया है। इसके चलते सक्ती जिले के ग्रामीण इलाकों में चल रहे विकास कार्य पूरी तरह से ठप हो गए हैं। सरपंच संघ ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही लंबित मटीरियल भुगतान की राशि जारी नहीं की, तो जैजैपुर, डभरा, मालखरौदा और सक्ती ब्लॉक के समस्त सरपंच उग्र आंदोलन करेंगे और सक्ती जिला मुख्यालय का घेराव करेंगे।

